पशु पालन विभाग

किन्नौर में पशुपालन व्यवसाय सबसे पुराना व उन्नत व्यवसाय रहा हें अब जबकि उद्यान ; होर्टिकल्चर द्ध यहाँ का मुख्य व्यवसाय हो गया हें व कृषि व्यवसाय को भी खूब बढावा दिया जा रहा हें लेकिन तब भी पशुपालन के बिना किसानो व बागवानो का गुजारा मुश्किल हें क्यूंकि इससे हमें अपने गुजारे व रोजगार के लिए दूधए मांसए अंडेए ऊनए व खाले मिलती हें इसके अलावा किसानो व बागवानो को खेतों व बगीचों के लिए बहुमूल्य उर्वरक खाद मिलती हें ! गौ पालन पुरे किन्नौर में समान रूप से किया जाता हें बल्कि एक गाँव में सबसे ज्यादा दूध उत्पादन दूरदराज के गाँव चांगो में होता हें ! भेड व बकरी पालन मुख्यत सांगला व भाबा घाटी में किया जाता हें ! शरद ऋतू में ये भेड़ व बकरी पालक अपने माल ; भेड़ व बकरियों द्ध के साथ हिण् प्रण् के मैदानी इलाको में चले जाते हें ! याक का पालन पूह उपमंडल व कुछ सांगला के रक्च्चम व छितकुल इलाकों में होता हें! वर्ष 2012 की पशु गणना के अनुसार जिले में भेड़ों की संख्या 66910 बकरियों की संख्या 33880 गोवंशीय संख्या 21386 है जिसमे से 11913 संकर नस्ल की व 2549 अन्य है ।

पता और संपर्क नंबर :-

उपनिदेशक
पशु स्वास्थ्य/प्रजन्न रिथत
रिकांग पिओ जिला किन्नौर

फ़ोन नंबर :-01786-222570
ई-मेल-:-ddah-kin-hp[at]nic.in

जिले में विभाग की पहुँच लगभग हर पशुपालक के घर तक हें क्यूंकि विभाग ने जिले की हर एक पंचायत में कम से कम एक पशु चिकित्सा संस्थान खोला हुआ हें जिनका ब्यौरा इस प्रकार हें 

  • उपमंडलीय पशुचिकित्सालय -3 प्रत्येक उपमण्डल मुख्यालय पर 
  •  पशुचिकित्सालय -18 पुरे जिले में 
  •  केन्द्रीय पशु औषधालय -1 चगांव में 
  • पशु औषधालय -38 पुरे जिले में 
  •  मुख्यमंत्री आरोग्य पशुधन योजना के तहत पशु औषधालय -8 ( 8 अलग  पंचायतो में )
  •  भेड़ प्रजनन प्रक्षेत्र -1 काक्स्थल में 
  •  कुक्कुट प्रसार केंद्र -2 रिकांगपिओ व टापरी में 
  •  भेड़ व ऊन् प्रसार केंद्र -1 सांगला में

जिले में विभाग का मुखिया उपनिदेशकए पशु स्वास्थ्य एवं प्रजनन हें जिसके साथ सहायक निदेशकए ; प्रसार व परियोजना द्ध हें और कार्यालय जिला मुख्यालय में स्थित है 

पशु पालन विभाग हि0 प्र0 जिला किन्नौर द्वारा समाज के विभिन्न वर्गों विशेषतयः कमजोर वर्गों के उत्थान हेतू चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से सम्बन्धित जानकारियों का संक्षिप्त विवरण निम्न लिखित प्रस्तुत हैः-

पशु चिकित्सा सुविधाएं:-

विभाग द्वारा जिला किन्नौर के विभिन्न स्थानों में कार्य कर रहे पशु चिकित्सालयो,औषधालयों एवम् कुक्कुट प्रसारण केन्द्रों के माघ्यम से पशुधन को बीमार होने की अवस्था में आवश्यक पशु चिकित्सा सेवाएं प्रदान करवाई जा रही है ताकि इन पशुओं को उचित समय में चिकित्सा प्रदान कर उन्हें बचाया जा सकेे ।

पशु टीकाकरण कार्यक्रम:-

पशुओं को भयानक रोगों/ महामारियों से बचाव के लिए समय-समय पर पशु टीकाकरण किया जा रहा है । पशु टीकाकरण में मुख्यतयः मुहं खुर रोग, पी0पी0आर0 टीका, पागलपन से बचाव, ऐण्टेरोटोक्समिया तथा ैभ्म्म्च् च्व्ग् इत्यादि का टीकाकरण किया जा रहा है । पागलपन बचाव टीका के अतिरिक्त सभी अन्य टीका निःशुल्क किया जाता है।

 कुक्कुट विकास कार्यक्रम:-

इस जिले में कार्यशील मात्रा दो कुक्कुट संस्थानों के माघ्यम से लोगों को एक निश्चित अनुदान पर कुक्कुट चुजे प्रदान किया जा रहा है । यह चुजे विभाग के बैकयार्ड योजना के तहत दिया जा रहा है इसी योजना के तहत कुक्कुट पालकों को कुक्कुट पालन का प्रशिक्षिण प्रदान किया जा रहा है ।

 

किराया मुक्त पशु आहार कार्यक्रम:-

केन्द्र द्वारा प्रायोजित (वि0के0स0) इस योजना के अन्र्तगत विभाग 20 सुत्रीय कार्यक्रम के तहत गौ पशु/दुधारू पशुओं के लिए शत-प्रतिशत किराया मुक्त पशु आहार उनके ग्राम तक (सड़क योग्य) पहुँचा कर प्रदान किया जा रहा है ताकि गौ पशुओं का स्वास्थय के साथ-2 दुग्ध उत्पादन शक्ति में वृद्वि हो सके।

बांझपन एवं पशु स्वास्थय कैम्पों का आयोजनः-

विभाग जिला के विभिन्न ग्रामों में जाकर इन शिविरों का आयोजन कर रहा है जिसमें विशेषज्ञ पशु चिकित्सक दल तैयार कर बांझपन एवं पशु स्वास्थ्य की जांच करते हैं तथा उन असाध्य रोगों का इलाज किया जाता है जिनका इलाज उन स्थानों पर कार्य कर रहे पशु चिकित्सा संस्थानों के माघ्यम से नहीं हो पाता है

60 प्रतिषत अनुदान पर मेंढा प्रदान करना एंवं भेड पालन सम्बन्धि कार्यक्रम:-

भेड पालको को उन के घटिया नसल के भेडो के नसल सुधार हेतु 60 प्रतिषत अनुदान पर उतम नसल के मेढेविभाग द्धारा प्रदान किया जा रहा है ताकि उन्हे अधिक से अधिक लाभ प्राप्त हो सके।इस के साथ-2 विभाग, भेड प्रजन्न प्रक्षेत्र करछम (काक्स्थल) एवं हि0प्र0 वूल फेडरेशन शिमला के माघ्यम से इस जिले के भेड पालकांे को समय-समय पर आवश्यक जानकारी तो प्रदान करता ही है, साथ-साथ उन्हें दवाईयां इत्यादि भी प्रदान करता है भेड पालकों की सुविधा हेतु भेडों का ऊन मशीन द्वारा जगह-जगह पर कल्पित किया जाता है तथा इन्हीं ऊन को भेड पालक चाहंे तो एक निश्चित मूल्य पर क्रय भी किया जाता है ।

 बी.पी.एल. कृषक बकरी पालन योजना :-

विभाग द्वारा गरीब कृषक जो कि बी.पी.एल. परिवार चिन्हित हैं को इस योजना के अतंर्गत दूध देने वाली अथवा मांस उत्पादन हेतु उतम नसल की बकरियो की इकाइयां 60 प्रतिषत अनुदान पर प्रदान की जा रही है ताकि इन बकरियो को पाल कर वे अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकें। बकरियां को निषुल्क बीमा करने के उपरान्त ही प्रदान की जाती हैं

 गौ पषु बीमा योजना:-

विभाग द्वारा इच्छुक गाय पालको को रिस्क मैनेजमेन्ट के अतर्गत 10 वर्ष से कम आयु वर्ग के गौ पषुओ का एक मुष्त तीन वर्ष हेतु बीमा करवाया जा रहा है। इस योजना के अन्तर्गत गाय पालको को उन की गायो की कुल बीमा प्रीरिमियम राषि का मात्र 20 प्रतिषत राषि ही प्रदान करना पडता है तथा षेष 80 प्रतिषत राषि सकरकार द्धारा वहन किया जाता है ताकि पषुधन की मृत्यु होने की स्थिती में पषुपालक को हानि की भरपाई हो पाये।

 मुख्यमऩ्त्री आरोग्य पषुधन योजनाः-

हिमाचल प्रदेष के लोकप्रिय मुख्य मन्त्रीं द्वारा उन पंचायतो में जहां पषु चिकित्सा सेवायेंउपलब्ध नहीं है, वहां पषु चिकित्सा संस्थान खोलने हेतू इस योजना को लागू किया है। जिसमें सम्बन्धित पंचायतों द्वारा किराया मुक्त आवास उपलब्ध करवाने पर पषु चिकित्सा संस्थान खोले गय है। इन कर्मचारियों को हि0प्र0 पषु कल्याण परिशद के द्वारा सम्बन्धित पंचायतों के माध्यम से वेतन प्रदान किया जायेगा।जिला किन्नौर में मात्र 08 पंचायतों में इस योजना के अन्र्तगत पषु चिकित्सा सहायता उपलब्ध करवा रही है।